शक्ति

तेरी सब कोशिशें सब घेराबंदी और सब चालें
अगर रख सकता है तो रख जरा अम्बर सँभालकर
मेरी ताकत जुनूँ मेरा और मेरे हौसलें में दम
मैं जब चाहूंगा ले जाऊंगा तारे निकालकर।

आ लौट चलें

कभी जो रख दिए थे तूने तेरे लब मेरे लब पर
मेरे होंठो पर आज तक तेरे निशान बाकी हैं

मेरे बिस्तर पे उभर आती हैं चादर में सिलवटें
तेरी ली हुई अंगड़ाइयों में जान बाकी है

यादों की शकल में तेरा फिर मुझ तक चले आना
मेरे पास क्या कोई तेरा समान बाकी है।

मेरा रस्ता तेरी मंजिल अभी बदले नहीं हैं ना
इस कहानी का शायद अभी अंजाम बाकी है।

#playboy

वो भी मुझ सा मासूम रहा होगा, कभी ठोकर खाया होगा
आपके किसी हमकिरदार ने उसे नफरत बोकर बनाया होगा
उसे हैवान बताकर जो अपने जख्मों की दुहाई देते हो
जब इंसान रहा होगा तो किसने गले लगाया होगा।

सब कुछ तू ही….

वो सुंदर चाँद सी है, वो बहारो की बयार है
वो जगमग रात पूनम की, वो परियो का श्रृंगार है
सुनहरी वादियो सी है, वो चंचल है हवाओ सी
उतरकर हिमगिरि से आती नदियों के बहाव सी

वो मेरी ज़िंदगी भर की दुआओं का हिसाब है
वो मेरी रोशनी है, वो ही मेरा आफताब है
वो मरहम है मेरा, वो मेरे जख्मों की दवाई है
ऊपर है खुदा एक और नीचे मेरा वो इलाही है

कितना कुछ भी लिख दूँ पर बयाँ मैं कर नही सकता
अपने लफ़्ज़ों में उसको नुमाया कर नही सकता
आखिर ये ही है मेरे इस तरन्नुम के तराने का
वो मेरी ज़िंदगी ओर इस कलम दोनो की स्याही है

दर बदर

बड़ी हसरत से निकले थे के उनके दर पे जाने को
हम कोसो तैर कर पहुंचे बस उनमे डूब जाने को
खुदा को कर किनारे ओर खुदी को मारकर अपनी
हम निकले एक ताजिर को खुदा अपना बनाने को

बड़ी उम्मीदों में भटके ज़माने भर की महफ़िल में
किसी का साथ पाने को किसी से दिल लगाने को
करके खाक भी खुद को हुआ है कुछ नही हासिल
बहुत हाथों में घूमे हम फकत पहचान पाने को

अहं ब्रह्मास्मि

शून्य का नीरव भी हूँ और अक्षर का स्वर भी
निर्माण की सुंदर कथा और प्रलय का ज्वर भी

मैं क्षितिज का पर्याय हूँ ब्रह्मांड का मैं स्त्रोत हूँ
मैं काल का कपाल हूँ शक्ति से ओत प्रोत हूँ

हूँ सुरमयी संगीत मैं, अल्हड़ अघोरी नाद भी
किन्नर नृत्य की सौम्यता और तांडव का उन्माद भी

समस्त की जड़ता हूँ मैं और समय की धार भी मैं हूँ
जीवन की मृदुता मैं ही हूँ मृत्यु का श्रृंगार भी मैं हूँ

ब्रह्मा का शांत स्वरूप हूँ और शिव का रुद्र अवतार भी
सरस्वती की वीणा का सुर और शक्ति की तलवार भी

प्रारम्भ से अनंत तक जो कुछ भी है मैं ही मैं हूँ
मैं प्रकट हूँ, मैं निरंकार, मैं माया हूँ, मैं सत्य हूँ